जिला स्तरीय कार्य शाला एवं विज्ञान प्रदर्शनी प्रतियोगिता दिनांक 02 अक्टूबर 2018 और 03 अक्टूबर 2018 को श्री गाँधी इंटर कॉलेज उरई में प्रोफेसर एच सी वर्मा से नि आई आई टी कानपुर एवं उनकी टीम अन्वेषिका द्वारा छात्र छात्राओं को प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जायेगा

कौन बनेगा नन्हा कलाम ?

सपने वो नहीं, जो आप सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं, जो आप को सोने नहीं देते |

माध्यमिक शिक्षा एवं बेशिक शिक्षा विभाग जालौन तथा जिला विज्ञान क्लब जालौन द्वारा मिलकर जनपद के छात्र /छात्राओं मैं वैज्ञानिक सोच एवं विज्ञान के क्षेत्र मैं अभिनव प्रयोग ” कौन बनेगा नन्हा कलाम ” योजना प्रारम्भ की जा रही हैं | मुझे आशा ही नहीं अपितु विश्वाश हैं की यह योजना निश्चित रूप से जनपद के छात्र/छात्राओं को विज्ञान के प्रति जिज्ञासु एवं खोजपरक बनने में सहायक सिद्ध होगी |

परिकल्पना और कार्य योजना

परिकल्पना – जनपद जालौन में अध्ययनरत कक्षा ६ से १० तक के छात्र /छात्राओं को विज्ञान आधारित गतिविधियाँ कराना, उनका सतत मूलयांकन करना,प्रतिभागी बच्चो में से श्रेष्ठतम छात्र की पहचान करके उसे जनपद का नन्हा कलाम -2018″ घोषित करना

कार्य योजना – यह योजना एक मिशन के रूप में किर्यान्वित की जायेगी | योजना के अन्तर्गत एक निश्चित समयान्तराल पर विध्यालय,तहसील एवं जनपद स्तर पर छात्र /छात्राओं के मध्य विज्ञान क्विज, मॉडल प्रदर्शन, निबन्ध,वाद -विवाद,भाषण आदि प्रतियोगिताओ एवं क्रिया कलापों का आयोजन करना,वर्ष के अन्त में सबसे अधिक प्रतिभाशाली छात्र की पहचान कर उसे नन्हा कलाम की उपाधि देना उस घोषित नन्हा कलाम द्वारा प्रस्तुत किया गया अभिनव प्रयोग /अविष्कार को राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना साभिमालित है |

गुरु के मुख से …. कलाम के लिए

तेरी उंगलियों ने निथारा था दर्द मेरे बालों से और भरी थी मुझमें अपने विश्वास की शक्ति निर्भय होने की जीतने की कयामत के दिन मिलेगा तुझसे फिर तेरा कलाम माँ तुझे सलाम !(ए. पी. जे. अब्दु कलाम )

एक अवसर पर हमने उन्हें उनसे यह प्रशन किया कि-डॉ0 कलाम आप सदेव इतने स्फूर्तिवान ,इतने उत्शाहधार्मी कैसे बने रहते है ? लिफ्ट के द्वारा ऊपर से नीचे के तल में उतरने हुए , समय के उस छोटे से अंश में कमाल साहब ने अपना उत्तर दिया- ‘मैं हर पल मात्र एक ही बात का चिन्तन करता रहता हूँ , कि मैं उसे ऐसा क्या दे सकता हूँ , जिससे वह प्रशन्ता का अनुभव करे या कि मैं एक साधु से मिलु , मेरे अंदर से यही भाव उठता हैं की में इन्हे क्या दे सकता हूँ ? यही जीवन दृष्टि मुझे युवा और ऊर्जावान बनाये रखती है | ‘आज जब कि देकर, बदले में कुछ प्राप्त करने का भाव एक सिद्धांत जैसा हो गया है , डॉ 0 कलाम की यह बात समाज का पूरा चिन्तन-परिदृश्य बदल सकती